हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस रिवायत को "बिहारूल अनवार" पुस्तक से लिया गया हैं इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
:قال امیرالمؤمنین علی علیہ السلام
يَكفيكَ مِنَ الحاسِدِ أَنَّهُ يَغتَمُّ وَقتَ سُرورِكَ.
हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया:
हासिद के लिए यही सज़ा काफी है की तेरी खुशी के वक्त वह ग़मगीन और रंजीदा होता है।
बिहारूल अनवार,भाग 72,पेंज 253
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